काश ...........आप लौट आते पापा !!! by atul kumar
काश ………..आप लौट आते पापा !!!
December 15, 2020
कौन हो तुम ..... by atul kumar
कौन हो तुम …..
December 15, 2020
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सिसकियाँ….एक एहसास

सिसकियाँ....एक एहसास by atul kumar
रात की तन्हाइयों में ठहरी हुई सी सिसकियाँ
वीरानों को चीरने की कश्मकश में सिसकियाँ
मानो इंतेज़ार है इनको एक नई सुबह की
यूँ ही नहीं करवटें बदलती ये सिसकियाँ।


अस्तित्व को जिनके पैरों तले रौंदा गया
घायल कहीं चित्त को किया,
एक नए आयाम की तलाश में
भीड़ में ही खो गयीं,
आज भी उन चीथड़ों को ढूंढती
फिर रहीं ये सिसकियाँ।

जलती हुई लाशों को देखूँ या सजी हुई सेजों को
या देखूं लालची नज़रों से छिपती छिपाती नारीत्व को,
अपनी बर्बादी की दास्तान कहती हैं ये सिसकियाँ।
ये समाज एक वीराना है बस घुटन ही घुटन है इसमें
हैवानियत है चरम पर, मासूमियत भी चुपचाप है,
लगता है किसी अनजान आहट को सुन,
घबराती है ये सिसकियाँ।

धुआँ है दूर तलक, चारोँ तरफ अँधेरा है
है अगर कहीं रौशनी वो भी एक छलावा है।
द्वंद में फसीं इधर उधर,
मंजिल की तलाश में भटकती हैं सिसकियाँ।

साँस लेती रहती हैं आहिस्ता आहिस्ता
किसी चिंगारी की तरह,
सोचता हूँ मैं अकिंचन बैठा हुआ
जाने क्या चाहती हैं ये सिसकियाँ

तोडना चाहती हैं हर बंधन को
खुली वादियों में स्वछन्द विचरण करना चाहती है
जाने कौन समझेगा नारी की ये सिसकियाँ
रात की तन्हाइयो में ठहरी हुई सी सिसकियाँ।

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