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December 13, 2020
मेरे सपनों की परी by atul kumar
मेरे सपनों की परी
December 15, 2020
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वो मटमैले ख़त

वो मटमैले ख़त by atul kumar
मटमैले धूल में सने लिफाफे में बंद फटेहाल से वो ख़त
डिग्री वाली किताब के फटे हुए झाँकते पन्नों के बीच में जब मिले

तो एहसास हुआ कि कितने मौसम बदल गए, कितने चेहरे बदल गए
भावनाओं की आंख मिचौनी और उम्र के जाने कितने पड़ाव से हम गुजर गए
आज महसूस हुआ कितनो रिश्तों के धूप और सांझ की हर तपिश में हम पक गये।

जैसे किताब एक जिंदगी हो और उसका हर पन्ना जिन्दगी का हर फलसफ़ा
और वो ख़त एक आईना जिसपर जमी हुई धूल किसी खिड़की की तरह
गुजरे वक़्त की सीढ़ियों से उन रिश्तों के गलियारों में ले गयी

कोई ख़त जो बीच में हाथ छुड़ा गया
कोई ख़त जो हमें बेवफा बता गया
रिश्तों के बोझ से डर एक ख़त रास्ता बदल गया
कोई ख़त किसी और किताब के पन्नों के बीच चला गया
हर ख़त की एक कहानी थी, हर ख़त जिंदगी जीने का अंदाज़ बता गया

वो ख़त कागज़ के टुकड़े नहीं, तजुर्बों के लिबास में लिपटे
लफ़्ज़ों के चादर ओढ़े एहसासों के धूल में सनी यादें हैं
उनको उन्हीं किताबों में ही रहने दो

बदल गयी है जिंदगी और किताब भी
कुछ और अल्फ़ाज़ अब उन पन्नों में लिखने दो।

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