कितने जिद्दी थे न पापा by atul kumar
कितने जिद्दी थे न पापा
December 15, 2020
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रस्म होली की, प्यार रंग का

रस्म होली की, प्यार रंग का by atul kumar
किस रंग से रंगूं, किस रंग से सजाऊँ मैं तुमको,
चढ़ेगा कौन सा रंग तुमपे ये बताओ हमको
सारे रंग इंद्रधनुष के तो,
मेरे बदरंग जिंदगी में भर दिए
ऐ मेरी जिंदगी जरा मुझे भी तो बताओ
फ़ागुन के महीने में कैसे बिना रस्मों रिवाज़
जीवन भर के लिए कैसे बनाऊ अपना तुमको

काश की इन लम्हों को अपने मनचाहे रंगों से रंग पाता
लाल, गुलाबी, निले और पीले रंगों से तेरी जिंदगी को सजा पाता,
ऐसे रंग जो कभी मिट न सके
उन रंगों से रंग तुम्हे अपना बना पाता।


वो पिले रंग की हल्दी गालों पे लगा देता,
गहरे हरे रंग की मेहन्दी से प्यार का शगुन लगा देता।
लाल रंग की लाली लग जाती जो तेरे हाथों में
सितारों से सजी लाल चुनरी भी, तेरे माथे पे सजा देता।
होते जो गुलाबी तेरे गाल हया से काश उस रंग को मैं चुरा लेता,
नीली आँखों में तेरे एक सपना और सजा देता


होली ही नहीं, जिंदगी के हर लम्हे को प्यार के रंगों से रंग देता,
हम दोनों कुछ इस तरह मिलते की,
रंगों के बौछार में सब कुछ घुल जाता
और बस प्यार का एक रंग रह जाता।
रस्म होती होली की, औए काश रंगों के बहाने
मैं तुमको अपना बना पाता।

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