वो मटमैले ख़त by atul kumar
वो मटमैले ख़त
December 15, 2020
पर आप न आये पापा by atul kumar
पर आप न आये पापा
December 15, 2020
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मेरे सपनों की परी

मेरे सपनों की परी by atul kumar
वो आई थी उस सुबह अपनी मुट्ठी में,
जहान भर की खुशियां भरकर
आकाश में मेरे सपनों के पंख लगा
दूर देश से आयी थी मेरे खातिर

परियों वाली कहानी जैसी थी वो
हर ख़्वाब को हक़ीक़त में बदल देती थी
जहाँ अंधेरा देखती उजाला भर देती थी
हर मुश्किल जैसे आसान हो,
अपने जादुई मुस्कान से एक पल में दूर कर देती थी।

अधूरी सी लगती थी जब भी सांसे,
परेशान करती थी जब उलझी सी बातें
मेरे खालीपन को अपने प्यार से भर देती थी
जाने कैसा जादू था उसकी आँखों मे
मुझसे ही मेरा वजूद चुरा लेती थी।

वो सात दिन सपनों जैसा था
लगा जैसे मैंने बस अभी जिंदगी जीना शुरू किया था
फिर एक दिन वो चली गयी
ये बोलकर की मैँ फिर आउंगी
वो सात दिन की खुशियां ताउम्र के लिए लाऊंगी।

एक साल गुजर गया पर उन सात दिनों का एहसास आज भी जिंदा है
उसकी बातें, उसका एहसास, उसकी सांसे, उसकी खुशबू आज भी जिंदा है

एक इंतजार मेरे अंदर सांसे लेता रहता है
वो है तो मैं हूँ, ये एहसास आज भी जिन्दा है

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