वो बचपन फिर लौट आता poem by atul kumar
वो बचपन फिर लौट आता
December 15, 2020
काश ...........आप लौट आते पापा !!! by atul kumar
काश ………..आप लौट आते पापा !!!
December 15, 2020
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मेरा जीवन आधार- ” भाभी माँ “

मेरा जीवन आधार- " भाभी माँ " poem by atul kumar
क्या हुआ जो आपने हमें जन्म नहीं दिया,
क्या हुआ जो मैं आपकी गोद में नहीं पला,
क्या हुआ जो मेरी किलकारियां,नहीं गुंजी आपके आंगन में
क्या हुआ जो आपकी अंगुली पकड़ मेरा बचपन न चला

सोचता हूँ मैं अक्सर, उन पौधों का क्या होता..
मिट्टी में बस बीज डालकर अगर छोड़ दिया होता
पानी से न कोई सींचता उन पौधों को तो क्या होता,
तेज़ धूप में कोमल पत्तों को अगर छाँव न मिलता
जड़ों से खिसकते मिट्टी के परत को , अगर कोई न भरता
अनचाहे शाखों को अगर किसी ने कांटा छांटा न होता,
मुरझा जाता, टूट जाता, जड़ सहित मिट्टी में फिर मिल जाता।

आपने हमें जन्म नहीं, नया जीवन दिया है,
काँटों से भरे इस जीवन को, फूलों भरा आंगन दिया है।
बोझिल होते मेरे सपनों को एक आकार दिया है
वक़्त के थपेड़ों में अपने हाथों का सहारा दिया है,
जीवन के इस तेज धूप को ममता भरा छाँव दिया है।

उम्र के हर पड़ाव पर, हर रिश्ते में, आपको ढलते हुए देखा
माँ की तरह प्यार करते, कभी सख्त पिता के रूप में देखा
स्कूल और कॉलेज में सच्चा दोस्त बनते,
राखी के त्यौहार में एक बहन के रूप में देखा
एक भाई की तरह हमराज बनते तो कभी,
बड़ी भाभी के रूप पे ममता से भरी माँ को देखा।

"भाभी माँ" काश इन दो शब्दों का अर्थ हम जता पाते,
काश उस पौधे के जीवन में उस माली का वजूद बता पाते।
हर कल्प उस पौधे का, कैसे उस माली का ऋणी है,काश हम दिखा पाते।

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