मेरे सपनों की परी by atul kumar
मेरे सपनों की परी
December 15, 2020
कितने जिद्दी थे न पापा by atul kumar
कितने जिद्दी थे न पापा
December 15, 2020
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पर आप न आये पापा

पर आप न आये पापा by atul kumar
जेठ की दुपहरी से नहाती सुनसान सड़के
उन सड़को पे घूमता वो कुल्फी का रेहड़ी वाला
घर के आंगन में चादर पे बिछी कच्ची अमिया
गलियारे में फैली आचार के मसाले की खुशबू
नानी के यादों वाली गर्मियों की छुटियां,
भाई बहनों की वो धम्मा चौकड़ी
रिश्तों के नर्म तपिश में डूबे वो गर्म शाम
सब तो है लौट कर आये.........पर आप न आये पापा

मिठाइयों वाली दशहरा, पटाखों वाली दीवाली की गूंज
रंगों वाला फाल्गुन का महीना, बसंत ऋतु की वो पुरवाई
सर्दियों की वो गुनगुनी धूप वाली बैठकी
ठिठुरते रातों में दुबकी कहानियों वाली मखमली रजाई
हर मौसम ने रंग बदला, त्योहारों ने भी ली अंगड़ाई
सब तो है लौट कर आये .....पर आप ना आये पापा

फ़ोन की घंटी वाली बात कहाँ, तस्वीरों से बाते अब करते हैं
हार-जीत, सुख -दुख, रूठना- मनाना करते हैं
दूर हो हमसे पर दिल से नहीं बस उम्मीदों के साथ जीते हैं
बदल गयी तासीर जिंदगी की और सब मंजर भी बदल गए
जिंदगी लौटी भी तो टुकड़ो में बदरंग और बेमतलब बनकर
लौटी है अश्कों में डूबी हुई....
सब तो है लौट कर आये...पर आप न आये पापा

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